मौत का इंतज़ार है,सफ़र जिन्दगी का,
कब्रिस्तान है मुकाम जिन्दगी का
तब क्यों नफरत में जीते हैं?
ये कौन सा हिसाब जिन्दगी का
प्यार ना हो जिस जिंदगी में,
क्या रखा है फिर उस जिन्दगी में
निरंतर जीते हैं जो दरिंदगी में,
दोजख भी नसीब ना होगी
उन्हें फिर किसी भी जिन्दगी में
05-09-2010











