मेरी इल्तजा तू सुन ले,
मेरा प्यार कबूल कर ले
मैंने तुझको चाहा है,
मन ही मन तुमने माना है
ये बात जुदा है ,
तुम हाँ नहीं भरोगी,
बात अपनी रखोगी
मैं जानता हूँ ,
तुम मुझे चाहती हो,
पर दुनिया से घबराती हो
कहना चाहते हुए भी ,
कह नहीं पाती हो
प्यार कब तक छुपाओगी,
कब तक हमें सताओगी
सच से पर्दा हटाओ,
अब उसे सामने लाओ
आगे बढ़ प्यार करो,
निरंतर इकरार करो,
सच को स्वीकार करो
03-09-2010











