वे आये या ना आये,
अब फर्क नहीं पड़ता
वो बुलायें या ना बुलायें,
अब फर्क नहीं पड़ता
जख्म इतने खाये हैं,
अब फर्क नहीं पड़ता
इतना दुतकारे गये हैं,
अब फर्क नहीं पड़ता
इतना सताए गये हैं,
अब फर्क नहीं पड़ता
इतना तडपाये गये हैं,
अब फर्क नहीं पड़ता
अब गम की चादर ओढ़ ली,
खिजा से दोस्ती करली,
कुर्बान हसरत अपनी कर दी
ना ज़िंदा हूँ ना मुर्दा हूँ,
वक़्त कट जाये,
इस इंतज़ार मैं बैठा हूँ
बस दुआ खुदा से करता हूँ,
निरंतर इबादत करता हूँ
वे आये या ना आये,
अब फर्क नहीं पड़ता
03-09-2010











