मुलाक़ात तो हुई,मगर बात न हुई
बगल में बैठे थे,पर अपने में खोये थे
शायद झिझक रहे थे,या सोच रहे थे
कैसे शुरू करें?
दिखाने को नज़र सामने थी,
पर जान कहीं और अटकी थी
बातें बहुत कहने को थी,
बरसों से जो भरी थी
इसी उहापोह में,वक़्त निकल गया
जाने का समय हो गया,
वो चले गये, सवाल फिर छोड़ गये
मन की बात मन में ही रह गयी
जो कहनी थी,अनकही रह गयी
मुलाक़ात तो हुई,मगर बात न हुई
04-09-2010











