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रोमांस.प्रेम,की चर्चा


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#1 Silence

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Posted 10 February 2010 - 08:19 PM


Romance - Love  - propose  रोमांस.प्रेम,की चर्चा
प्यार-मोहब्बत -निष्ठा - इश्क -जज्बात -दिलों - इजहार और  आशिक


उफ..

कैसे करें प्रपोज



प्यार करना आसान है पर प्यार का इजहार करना बड़ा ही मुश्किल है। मौका मिलता है पर आप चूक जाते हैं सोचते हैं फिर कभी सही। कहीं ऐसा न हो कि आपकी महबूबा किसी और की होकर चली जाए और आप हाथ मलते रह जाएँ। नहीं नहीं ऐसा आपके साथ नहीं होगा। क्योंकि हम बता रहे हैं आप को कुछ रोमांचक टिप्स बिल्कुल लीक से हटकर-

1. यदि आपकी गर्लफ्रेंड को रोमांच भरे खेल पसंद हैं जैसे रॉक क्लाइंबिंग और अंडर वाटर डाइविंग तो रॉक क्लाइंबिंग के बाद पहाड़ी के सबसे ऊपरी चोटी पर पहुँच कर आप अपने प्यार का इज़हार कर सकते हैं। या समुद्र की गहराई में मछलियों के बीच शादी के लिए पूछ सकते हैं।


2. आप ज्यादा हिम्मती हैं और कुछ बड़ा काम करना चाहते हैं तो अपनी गर्लफ्रेंड के साथ फिल्म देखने का प्लान करें और फिल्म के अंतराल में अपना वीडियो प्ले करने की व्यवस्था करें जिसमें आप अपनी गर्लफ्रेंड से जीवन भर साथ देने का सवाल पूछ रहे हों।


3. यदि आप अपनी गर्लफ्रेंड के साथ फ्लाइट में कहीं जा रहे हों तो इंटरकॉम से भी उसको प्रोपोज कर सकते हैं।


4. जिस रास्ते आपकी गर्लफ्रेंड रोज़ जाती है, उस रास्ते के एक होर्डिंग पर किराए पर लेकर उस पर आप यह लिखवा सकते हैं-'सपना, विल यू मैरी मी?' आपका यह अंदाज आपकी प्रिय को ज़रूर पसंद आएगा।


5. बरसात के मौसम में अपनी गर्लफ्रेंड को रिमझिम बारिश में एक लाँग ड्राइव पर ले जाएँ। और उस रोमांटिक माहौल में उसे शादी के लिए प्रपोज कर


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#2 Silence

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Posted 10 February 2010 - 08:23 PM


साथी चुनने में अहम होती जा रही है सूरत

भारत में पुरानी कहावत है कि लड़की की चमड़ी देखो और लड़के की दमड़ी। लड़कियों के
बारे में अकसर कहा जाता है कि वे फैसला करने से पहले पुरुष की ताकत और पैसा देखती हैं। लेकिन अब चीजें बदल रही हैं। अमेरिका की नॉर्थवेस्ट यूनिवसिर्टी में हुई रिसर्च से पता चला है कि लड़के ही नहीं, लड़कियां भी न सिर्फ डेट बल्कि शादी के लिए भी हैंडसम और सेक्सी पार्टनर चाहती हैं। इतना ही नहीं, जैसे औरतों को ताकतवर और कमाऊ पुरुषों की लालसा होती है, उसी तरह पुरुषों को भी समर्थ स्त्रियां पसंद आती हैं। यानी रोमांस में पैसा और लुक दोनों ही मैटर करते हैं।

कोलंबिया यूनिवसिर्टी से जुड़े प्रोफेसर लिनार्ड ली की निगरानी में एक वेबसाइट बनाई गई www.hotornot.com। इस साइट पर डेटिंग के लिए इंट्रेस्टेड लोगों को अपने प्रपोजल पेश करने थे और विजिटर को उनके लुक के बेस पर ग्रेडिंग करनी थी। इस दौरान देखा गया कि खूबसूरत औरतों ने सेंस ऑफ ह्यूमर या पावर के बजाय हैंडसम पार्टनर के साथ डेट पर जाने को प्राथमिकता दी। इस स्टडी में यह दिलचस्प बात देखने में आई कि आज भी औरतों के बजाय आदमी लुक पर ज्यादा फिदा होते हैं। खूबसूरती की तलाश के दौरान पुरुष खुद अपनी शक्लो-सूरत भूल जाते हैं। इसके अलावा जो लोग दिखने में साधारण चेहरे मोहरे और कद काठी के होते हैं, वही डेट के लिए लुक से ज्यादा सेंस की बात करते हैं। ये लोग अपनी बात के समर्थन में तमाम तर्क गढ़ते हैं मसलन लुक्स आर ऑलवेज डिसेप्टिव या खूबसूरती का सारी जिंदगी अचार डालना है क्या।

लेकिन भारत में भावी जीवनसाथी के बारे में आम धारणा यह है कि लड़कियों को पुरुषों के रंग-रूप की बजाय उनका दोस्ताना रवैया और बेहतर करियर अपनी तरफ खींचता है तो लड़के भी ऐसी जीवनसंगिनी चाहते हैं जो देखने में तो ठीक हो ही, दिमाग से भी खूबसूरत हो। इसी फेर में कई बार ऐसे जोड़े बनते हैं जिनमें कोई मेल नजर नहीं आता। शायद इसीलिए अकसर सड़क पर औसत से चेहरे वाले पुरुष के साथ खूबसूरत औरत को देखते ही दिलजले बोल उठते हैं देख लंगूर के साथ अंगूर।

तो क्या वाकई हिंदुस्तान में औरतें जीवनसाथी चुनने के लिए महज लुक और मनी का ही पैमाना नहीं रखतीं या उन्हें भी चमड़ी और दमड़ी पर नजर रखकर ही पुरुषों को चुनना होता है। लड़कियां अकसर कहती मिल जाएंगी कि फाइनली आई गॉट ए परफेक्ट पार्टनर। देखने में बहुत कूल डूड टाइप का नहीं है लेकिन मुझे अच्छे से समझता है। मुझे खुद में बदलाव नहीं लाने होंगे, वगैरह।

तो आखिर है क्या है रोमांस और हमेशा के लिए साथी चुनने के दौरान फैसला तय करने वाला मंत्र? क्या इस तरह के सरलीकरण किए जा सकते हैं कि औरतें लुक्स के बजाय दूसरी क्वॉलिटी देखती हैं और पुरुष फिजिकल ब्यूटी या ये सारे तर्क सदियों पुराने हो चुके हैं।


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#3 Silence

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Posted 10 February 2010 - 08:26 PM

जानिए इश्क के बारे में इश्क क्या है?

दो दिलों के धड़कने का नाम है इश्क, जज्बातों की आंधी है इश्क, एक-दूसरे की चाहत में कुछ कर गुजरने का जज्बा है इश्क। इश्क सिर्फ इश्क है और जब इश्क हो जाता है तो आशिक इसके बदले में कुछ पाने की इच्छा नहीं रखते सिवाय इश्क के। क्योंकि मोहब्बत ऐसे भावनात्मक जुड़ाव का नाम है जो दो दिलों के बीच पैदा होता है। यह वो जज्बा है जो आशिकों को एक अलग ही दुनिया में ले जाता है, जहाँ ऊँच-नीच, अमीर-गरीब या किसी और के लिए कोई जगह नहीं होती, यहाँ अगर कुछ है तो सिर्फ प्रेम, प्रेम और प्रेम...।

लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस हसीन दुनिया में कदम रखने के पहले आपको किन स्तरों से गुजरना होता है। चाहे आप इस बारे में जानें या न जानें लेकिन इतना जरूर है कि इस खूबसूरत एहसास को महसूस करने के लिए हर वो रास्ता हसीन होगा, जहाँ से गुजरकर प्रेम की दुनिया में जाया जाए। आइए हम यहां बात करते हैं उन स्थितियों के बारे में, जो आपके प्यार को स्थायित्व देने आपकी मददगार होंगी।

आकर्षण : प्यार में सबसे पहली स्थिति होती है आकर्षण और ये आकर्षण दो तरीकों से हो सकता है, शारीरिक या फिर भावनात्मक। हमारे रोजमर्रा के जीवन में या अचानक मिलने वाले लोगों में कोई एक ऐसा होता है, जिससे मिलने, बात करने और दोस्ती करने के लिए आपका दिल हमेशा बेताब रहता है। आप हमेशा इसी कोशिश में लगे रहते हैं कि किसी तरह से उनसे बातचीत का सिलसिला शुरू हो। और जब आप उनसे दोस्ती कर चुके होते हैं तो धीरे-धीरे आपके बीच भावनात्मक लगाव पैदा होने लगता है। आपकी रुचियां, आपके विचार आदि मिलने लगते हैं। आपके बीच होने वाली बातचीत, बहस का मुद्दा भी अक्सर समान ही रहता है। इस तरह आप उनसे भावनात्मक रूप से जुड़ने लगते हैं, जिसकी परिणति प्यार के रूप में होती है।

रोमांस : जब दो लोगों के बीच पैदा हुआ आकर्षण प्यार में तब्दील हो जाता है तो एक-दूसरे के लिए कुछ कर गुजरने की चाह उत्पन्न हो जाती है। आप हरदम उन्हें प्रभावित करने की कोई न कोई जुगत भिड़ाने में लगे रहते हैं। हो सकता है आप उनसे कुछ पाने के लिए उन्हें प्रभावित करना चाहते हों, जैसे कोई गिफ्ट या कुछ और लेकिन कई बार ऐसा भी होता है कि आप उन्हें खुश करने के लिए, उन्हें इस बात का अहसास कराने के लिए कि आप उन्हें कितना प्यार करते हैं, उनके पसंदीदा कार्य करने लगते हैं। इसके पीछे आपकी कुछ पाने की लालसा नहीं होती, आप जो कुछ करते हैं, सिर्फ उनके लिए, उनकी खुशी की खातिर करते हैं।

धैर्य : प्यार हुआ, इकरार हुआ, प्यार से फिर क्यों डरता है दिल...। शायद इसलिए कि हो सकता है भावनाओं की रौ में बहकर आप वो सब
जब दो लोगों के बीच पैदा हुआ आकर्षण प्यार में तब्दील हो जाता है तो एक-दूसरे के लिए कुछ कर गुजरने की चाह उत्पन्न हो जाती है। आप हरदम उन्हें प्रभावित करने की कोई न कोई जुगत भिड़ाने में लगे रहते हैं
कर जाएँ, जो उचित नहीं है। इन्हीं भावनाओं को वश में करने के लिए आवश्यकता है धैर्य की। क्योंकि धैर्य से काम लेकर ही आप अपने प्यार को एक लंबी जिंदगी दे सकते हैं।

अंतरंगता : यह वो स्थिति है, जब आप अपने प्रिय के इतने करीब होते हैं कि आप दोनों के बीच एक विशिष्ट प्रकार का सामंजस्य पैदा हो जाता है। ऐसा सामंजस्य या कहें कि ऐसा रिश्ता जिसमें आप अपना सोच, अपने विचार, अपनी अनुभूतियां एक-दूसरे के साथ बांटते हैं और कई बार तो बिना कुछ कहे ही एक-दूसरे के दिल की बात जान जाते हैं। अंतरंगता एक निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है और जैसे-जैसे आपका रिश्ता प्रगाढ़ होता जाता है, ये बढ़ती जाती है।

वादा : यदि आप अपने प्यार की लंबी जिंदगी चाहते हैं तो कभी भी ऐसा वादा न करें, जो आप पूरा न कर पाएँ अन्यथा ये आपके संबंधों में दरार डाल सकता है। जब आपका समय अच्छा हो तो आप किसी भी तरह का कोई वादा कर लेते हैं लेकिन हो सकता है कि आप जो वादा अपने प्रिय से कर रहे हैं, किसी कारण से उसे पूरा न कर पाएँ। इसलिए जहां तक हो सके वादा न ही करें।

और फिर प्यार तो प्यार है, खुदा की सबसे बड़ी नेमत...यहाँ कहाँ किसी वादे या वादाखिलाफी के लिए कोई जगह है। अगर यहाँ कुछ है तो सिर्फ मोहब्बत....।


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#4 Silence

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Posted 10 February 2010 - 08:28 PM

आखिर रोमांस है क्या?
एक खूबसूरत अहसास रोमांस


रोमांस शब्द के मायने पुराने समय से आज तक काफी बदले हैं मगर सच है कि आज भी यह शब्द एक खूबसूरत एहसास से भर देता है। रूह में एक खुशबू सी उतरती चली जाती है और सहेजकर रखे पुराने खतों को फिर से पढ़ने को जी करने लगता है।

एक बहुअर्थी शब्द है रोमांस, जिसका शाब्दिक अर्थ हो सकता है कल्पना। एक प्यारी सी कोई बात, मीठी छेड़छाड़ जो तन-मन में स्पंदन जगाकर रोम-रोम पुलकित कर दे, मन में जोश और उत्साह भरकर जीने की इच्छा बढ़ा दे। यह सिर्फ एक अहसास है, जिसे शब्दों में बयान करना मुश्किल है। इसे सिर्फ दिल की गहराइयों से ही महसूस किया जा सकता है।

रोमांस जन्मा कैसे
रोमांस की उत्पत्ति कब और कहाँ हुई, यह कहना थोड़ा मुश्किल है। पहले-पहल इसका आम जीवन से कोई ताल्लुक नहीं था, राजा-रानियों की प्रेम कथाओं में इसका हलका-फुलका जिक्र होता था। फिर लिखित साहित्य आया। उसके बाद फिल्मों में रोमांस के हर पहलू का खूब खुलकर फिल्मांकन किया गया। पहले रोमांचक कहानियाँ उपन्यास पढ़ना, फिल्में देखना अच्छा नहीं समझा जाता था, रोमांस की तो बात ही दूर थी। यह सचमुच कल्पना ही था। इसलिए आम आदमी हमेशा हिचक के घेरे में रहा। वह रोमांस के रोमांच से अभिभूत तो रहा, मगर न तो उसे खुलकर स्वीकार सका और न महसूस कर सका।

  रोमांस प्रेम में तभी परिवर्तित होता है जब एक-दूसरे के प्रति रोमांस के भाव दोनों के मन में जगें वर्ना कामनाएँ सिर्फ रोमांस बनकर रह जाती हैं। रोमांस दो चाहने वालों को एक-दूसरे के करीब लाने, उनमें प्रेम जगाने का एक माध्यम है।      
रोमांस एक चुंबकीय आकर्षण है, इसलिए इसने इतनी जल्दी सबको अपने सम्मोहन में जकड़ लिया है। अकेलेपन की उदासियों में रोमांस ही है, जो जीवन में रंग भरने लगा है। एक तो रिश्तों की बढ़ती बराबरी व दोस्ती के तकाजे के चलते आए खुलेपन से रोमांस की संभावनाएँ बढ़ी हैं, दूसरी तरफ, जीवन की बढ़ती व्यवस्तताओं से उपजी, निराशा, ऊब, तनाव व अवसाद के चलते मनोचिकित्सकों नें भी रोमांस के महत्व को पहचना है और उसे मानवीय जीन का अनिवार्य हिस्सा बताया है।

आखिर रोमांस है क्या

रोमांस एक अहसास है जिसकी गहराई को सिर्फ महसूस किया जा सकता है। किसी प्रिय से निगाहे मिलने पर दिल की धड़कनें तेज हो जाती हैं और तन-मन में स्पंदन सा महसूस होता है, इसे ही तो रोमांस कहते हैं। रोमांस शब्दों का मोहताज नहीं है, यह आँखों और इशारों की भाषा खूब समझता है। रोमांस के बिना प्रेम का अस्तित्व नहीं होता। प्रेम की डगरिया का नाम है रोमांस। प्रेम अगर मंजिल है तो रोमांस पगडंडी, जो प्रेम की परिपक्वता प्रदान करती है। यह कोई जरूरी नहीं कि जिससे आप प्रेम करते हों वह भी आपसे उतनी शिद्दत से प्रेम करता हो।

रोमांस प्रेम में तभी परिवर्तित होता है जब एक-दूसरे के प्रति रोमांस के भाव दोनों के मन में जगें वर्ना कामनाएँ सिर्फ रोमांस बनकर रह जाती हैं। रोमांस दो चाहने वालों को एक-दूसरे के करीब लाने, उनमें प्रेम जगाने का एक माध्यम है।

रोमांस का अर्थ केवल प्यार-मोहब्बत और दैहिक संसर्ग नहीं, बल्कि रोमांस का अर्थ है अपने लक्ष्य को पाने के लिए निष्ठा व प्रेम। कोई भी व्यक्ति अपने मकसद को तब तक नहीं पा सकता जब तक उसके अंतर्मन में उस काम से प्यार और उसे कर पाने की इच्छा और लगन नही होगी। रोमांस एक तड़ित तरंगित गमियता है, दीवानगी है, एक पागलपन, एक सिरफिरापन है। इसके बाद ही कलाकार व दीवानों को अपने उद्देश्य की प्राप्ति होती है।

रोमांस की बदलती परिभाषाएँ

पुराने समय का रोमांस शायद कही अधिक रोमांटिक था, लुक-छिपकर एक-दूसरे को निहारना, लंबी सैर पर निकल जाना, कॉफी की चुस्कियाँ लेना और एक-दूसरे का हाथ पकड़ना आदि। स्पर्श के इस रोमांच को प्रेमी युगल कई दिनों तक नहीं, महीनों-सालों तक महसूस करते थे। रोमांस के नाम पर मन में जोश और उत्साह होता था। रोमांस का जिक्र आते ही होठों पर खिली शर्मीली मुस्कुराहट तो दिखाई दे जाती थी, लेकिन मन में फूटते लड्डुओं का अंदाजा तो चेहरे को देखकर लगाया जा सकता था।

दूसरी तरफ आधुनिक रोमांस की गति इतनी तेज है कि प्रेमी युगल के पास उसे महसूस करने के लिए, उन क्षणों को जीने के लिए समय ही नहीं है। आज का हाईटेक रोमांस भाषा-प्रधान है, जो ईमेल, चैटिंग और एसएमएस द्वारा तुरंत संचारित होता है। आज रोमांस को समय और दूरी का मुँह नहीं ताकना पड़ता। अब रोमांस का स्थान डिस्को, पार्टियों, डेटिंग आदि ने ले लिया है जहाँ शोरशराबे में इच्छाएँ-कामनाएँ पहले ही खत्म हो जाती हैं।

अंत में यहीं कहा जा सकता है कि रोमांस का भाव स्थायी नहीं है, बल्कि संचारी है। जो किसी विषय, वस्तु या फिर व्यक्ति विशेष के बारे में सोचते हुए तन-मन में संचारित होता है और कुछ भी पलों में गायब भी हो जाता है। प्रेम और रोमांस दोनों एक-दूसरे के पूरक हैं। इनके बिना जीवन ऐसे रेगिस्तान के समान है, जहाँ कभी कुछ नहीं खिल सकता।


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